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Cowpea Lalima Sonam SAS-25 Seeds
A Complete Guide for High Yield and Better Profit
1. Introduction
Cowpea (Lobia) is a nutritious pulse crop grown for seeds, green pods, and fodder. It grows well in warm climates and is widely cultivated across India.
2. Climate & Soil
- Climate: Warm season crop (25–35°C ideal)
- Rainfall: 600–1000 mm
- Soil: Well-drained sandy loam to loam soil
- Soil pH: 5.5–7.5
3. Land Preparation
- Plough the field 2–3 times to make the soil fine.
- Remove weeds and stones.
- Add FYM (Farm Yard Manure): 10–15 tons/hectare.
4. Sowing Time
Season | Time |
Kharif (rainy) | June–July |
Zaid (summer) | March–April |
Rabi (some regions) | October–November |
5. Seed Rate & Sowing
- Seed rate: 20–25 kg/hectare
- Spacing:
- Row to row: 30–45 cm
- Plant to plant: 10–15 cm
- Sow seeds 3–4 cm deep.
6. Irrigation
- Mostly grown as a rainfed crop.
- Irrigate:
- At flowering stage
- At pod formation stage
- Avoid waterlogging.
7. Fertilizer Management
Basal Dose
- Nitrogen: 15–20 kg/ha
- Phosphorus: 40–50 kg/ha
Biofertilizers
- Use Rhizobium culture/biofertilizer for better yield.
8. Weed Control
- First weeding: 15–20 days after sowing
- Second weeding: 30–35 days after sowing
- Keep the field weed-free.
9. Pest & Disease Management
Common Pests
- Aphids
- Pod borers
Pest Control
- Spray neem oil
- Use recommended insecticides if needed
Common Diseases
- Powdery mildew
- Leaf spot
Disease Control
- Use resistant varieties
- Maintain proper spacing and ventilation
10. Harvesting
- Green pods: Ready in 45–60 days
- Dry seeds: Ready in 70–90 days
- Harvest when pods dry and turn brown.
लोबिया (काउपी) लालीमा सोनम SAS-25 बीज
अधिक उपज और बेहतर लाभ के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका
1. परिचय
लोबिया (काउपी/लोबिया) एक पौष्टिक दलहनी फसल है, जिसे बीज, हरी फलियों और चारे के लिए उगाया जाता है। यह गर्म जलवायु में अच्छी तरह बढ़ती है और पूरे भारत में व्यापक रूप से खेती की जाती है।
2. जलवायु एवं मिट्टी
- जलवायु: गर्म मौसम की फसल (25–35°C उपयुक्त)
- वर्षा: 600–1000 मिमी
- मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी
- मिट्टी का pH: 5.5–7.5
3. भूमि की तैयारी
- खेत को भुरभुरा बनाने के लिए 2–3 बार जुताई करें।
- खरपतवार और पत्थरों को हटा दें।
- गोबर की सड़ी हुई खाद (FYM): 10–15 टन प्रति हेक्टेयर मिलाएं।
4. बुवाई का समय
| मौसम | समय |
|---|---|
| खरीफ (वर्षा ऋतु) | जून–जुलाई |
| जायद (ग्रीष्मकाल) | मार्च–अप्रैल |
| रबी (कुछ क्षेत्रों में) | अक्टूबर–नवंबर |
5. बीज दर एवं बुवाई
- बीज दर: 20–25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- दूरी:
- पंक्ति से पंक्ति: 30–45 सेमी
- पौधे से पौधे: 10–15 सेमी
- बीजों को 3–4 सेमी गहराई पर बोएं।
6. सिंचाई
- सामान्यतः इसे वर्षा आधारित फसल के रूप में उगाया जाता है।
- सिंचाई करें:
- फूल आने की अवस्था में
- फलियाँ बनने की अवस्था में
- खेत में जलभराव न होने दें।
7. उर्वरक प्रबंधन
आधारभूत मात्रा (Basal Dose)
- नाइट्रोजन: 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
- फॉस्फोरस: 40–50 किग्रा/हेक्टेयर
जैव उर्वरक
- अधिक उत्पादन के लिए राइजोबियम कल्चर (Rhizobium Culture) या जैव उर्वरक का उपयोग करें।
8. खरपतवार नियंत्रण
- पहली निराई-गुड़ाई: बुवाई के 15–20 दिन बाद
- दूसरी निराई-गुड़ाई: बुवाई के 30–35 दिन बाद
- खेत को खरपतवार मुक्त रखें।
9. कीट एवं रोग प्रबंधन
सामान्य कीट
- माहू (Aphids)
- फली छेदक (Pod Borer)
कीट नियंत्रण
- नीम तेल का छिड़काव करें।
- आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें।
सामान्य रोग
- चूर्णी फफूंदी (Powdery Mildew)
- पत्ती धब्बा रोग (Leaf Spot)
रोग नियंत्रण
- रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
- उचित दूरी और वायु संचार बनाए रखें।
10. कटाई
- हरी फलियाँ: 45–60 दिनों में तैयार
- सूखे बीज: 70–90 दिनों में तैयार
- जब फलियाँ सूखकर भूरी हो जाएँ, तब कटाई करें।
लालीमा सोनम SAS-25 लोबिया बीज की उचित खेती, पोषण और संरक्षण उपाय अपनाकर किसान अधिक उपज और बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
કાઉપીયા લાલિમા સોનમ SAS-25 બીજ
વધુ ઉપજ અને સારા નફા માટે સંપૂર્ણ માર્ગદર્શિકા
1. પરિચય
કાઉપીયા (લોબિયા/ચોળી) એક પૌષ્ટિક કઠોળ પાક છે, જે દાણા, લીલી શીંગો અને પશુચારા માટે ઉગાડવામાં આવે છે. તે ગરમ આબોહવામાં સારી રીતે વિકસે છે અને સમગ્ર ભારતમાં વ્યાપકપણે ખેતી થાય છે.
2. આબોહવા અને જમીન
- આબોહવા: ગરમ મોસમનો પાક (25–35°C આદર્શ)
- વરસાદ: 600–1000 મીમી
- જમીન: સારી નિતારવાળી રેતાળ દોમટથી દોમટ જમીન
- જમીનનું pH: 5.5–7.5
3. જમીનની તૈયારી
- જમીનને ભુરભુરી બનાવવા માટે 2–3 વાર ખેડ કરો.
- નીંદણ અને પથ્થરો દૂર કરો.
- ગોબર ખાતર (FYM): 10–15 ટન પ્રતિ હેક્ટર ઉમેરો.
4. વાવણીનો સમય
| મોસમ | સમય |
|---|---|
| ખરીફ (ચોમાસુ) | જૂન–જુલાઈ |
| ઝાયદ (ઉનાળો) | માર્ચ–એપ્રિલ |
| રબી (કેટલાક વિસ્તારોમાં) | ઑક્ટોબર–નવેમ્બર |
5. બીજ દર અને વાવણી
- બીજ દર: 20–25 કિગ્રા પ્રતિ હેક્ટર
- અંતર:
- હરોળથી હરોળ: 30–45 સેમી
- છોડથી છોડ: 10–15 સેમી
- બીજને 3–4 સેમી ઊંડે વાવો.
6. સિંચાઈ
- સામાન્ય રીતે વરસાદ આધારિત પાક તરીકે ઉગાડવામાં આવે છે.
- નીચેના તબક્કે સિંચાઈ આપો:
- ફૂલ આવવાના સમયે
- શીંગો બનવાના સમયે
- ખેતરમાં પાણી ભરાઈ ન રહે તેનું ધ્યાન રાખો.
7. ખાતર વ્યવસ્થાપન
આધાર ખાતર
- નાઇટ્રોજન: 15–20 કિગ્રા/હેક્ટર
- ફોસ્ફરસ: 40–50 કિગ્રા/હેક્ટર
જૈવ ખાતર
- વધુ ઉપજ માટે રાઇઝોબિયમ કલ્ચર/જૈવ ખાતર નો ઉપયોગ કરો.
8. નીંદણ નિયંત્રણ
- પ્રથમ નીંદણ: વાવણી પછી 15–20 દિવસે
- બીજું નીંદણ: વાવણી પછી 30–35 દિવસે
- ખેતરને નીંદણમુક્ત રાખો.
9. જીવાત અને રોગ વ્યવસ્થાપન
સામાન્ય જીવાતો
- મોલો (Aphids)
- શીંગ છિદ્રક ઇયળ (Pod Borers)
જીવાત નિયંત્રણ
- નીમ તેલનો છંટકાવ કરો.
- જરૂર પડે તો ભલામણ કરેલ જંતુનાશકોનો ઉપયોગ કરો.
સામાન્ય રોગો
- પાવડરી મિલ્ડ્યુ (ભુકી છારો)
- પાનના ડાઘ (Leaf Spot)
રોગ નિયંત્રણ
- રોગપ્રતિકારક જાતોનો ઉપયોગ કરો.
- યોગ્ય અંતર અને હવાની અવરજવર જાળવો.
10. કાપણી
- લીલી શીંગો: 45–60 દિવસમાં તૈયાર
- સૂકા દાણા: 70–90 દિવસમાં તૈયાર
- શીંગો સૂકાઈને ભૂરા રંગની થાય ત્યારે કાપણી કરો.
बिया लालिमा सोनम SAS-25 बियाणे
जास्त उत्पादन आणि अधिक नफ्यासाठी संपूर्ण मार्गदर्शक
1. परिचय
लोबिया (चवळी) हे एक पौष्टिक कडधान्य पीक आहे. याची लागवड दाणे, हिरव्या शेंगा आणि चारा यासाठी केली जाते. हे पीक उष्ण हवामानात चांगले वाढते आणि भारतभर मोठ्या प्रमाणावर घेतले जाते.
2. हवामान व माती
- हवामान: उष्ण हंगामातील पीक (25–35°C तापमान आदर्श)
- पर्जन्यमान: 600–1000 मिमी
- माती: चांगला निचरा होणारी वालुकामय ते मध्यम गाळाची माती
- मातीचा pH: 5.5–7.5
3. जमीन तयारी
- शेत 2–3 वेळा नांगरून भुसभुशीत करा.
- तण व दगड काढून टाका.
- शेणखत (FYM): 10–15 टन प्रति हेक्टर मिसळा.
4. पेरणीची वेळ
| हंगाम | कालावधी |
|---|---|
| खरीप | जून–जुलै |
| उन्हाळी (झायद) | मार्च–एप्रिल |
| रब्बी (काही भागात) | ऑक्टोबर–नोव्हेंबर |
5. बियाण्याचे प्रमाण व पेरणी
- बियाणे प्रमाण: 20–25 किलो प्रति हेक्टर
- अंतर:
- ओळ ते ओळ: 30–45 सेमी
- रोप ते रोप: 10–15 सेमी
- बियाणे 3–4 सेमी खोलीवर पेरा.
6. सिंचन
- हे पीक प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून घेतले जाते.
- खालील अवस्थांमध्ये पाणी द्या:
- फुलोरा येताना
- शेंगा तयार होताना
- शेतात पाणी साचू देऊ नका.
7. खत व्यवस्थापन
मूलभूत खत मात्रा
- नत्र (Nitrogen): 15–20 कि.ग्रॅ./हेक्टर
- स्फुरद (Phosphorus): 40–50 कि.ग्रॅ./हेक्टर
जैवखते
- अधिक उत्पादनासाठी रायझोबियम कल्चर/जैवखत वापरा.
8. तण नियंत्रण
- पहिली खुरपणी: पेरणीनंतर 15–20 दिवसांनी
- दुसरी खुरपणी: पेरणीनंतर 30–35 दिवसांनी
- शेत तणमुक्त ठेवा.
9. कीड व रोग व्यवस्थापन
सामान्य किडी
- मावा (Aphids)
- शेंगा पोखरणारी अळी (Pod Borers)
कीड नियंत्रण
- कडुनिंब तेलाची फवारणी करा.
- गरज असल्यास शिफारस केलेली कीटकनाशके वापरा.
सामान्य रोग
- भुरी (Powdery Mildew)
- पानांवरील ठिपके (Leaf Spot)
रोग नियंत्रण
- रोगप्रतिकारक वाणांची निवड करा.
- योग्य अंतर ठेवा व हवेशीर वातावरण राखा.
10. काढणी
- हिरव्या शेंगा: 45–60 दिवसांत तयार होतात.
- सुक्या बिया: 70–90 दिवसांत तयार होतात.
- शेंगा पूर्णपणे वाळून तपकिरी रंगाच्या झाल्यावर काढणी करा.
लोबिया लालिमा सोनम SAS-25 या वाणाची योग्य व्यवस्थापनासह लागवड केल्यास अधिक उत्पादन व चांगला आर्थिक फायदा मिळू शकतो.